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शनिवार, 7 नवंबर 2026
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आदित्यपुर कचरा प्लांट पर ठनी: वार्ड सभा में ग्रामीण बोले- नहीं बनने देंगे, मेयर का दावा- तय जगह पर ही बनेगा

ग्रामीणों का आरोप- ग्रामसभा की सहमति के बिना तैयार हुआ डीपीआर; मेयर संजय सरदार ने देरी के लिए एजेंसी को ठहराया जिम्मेदार

आदित्यपुर कचरा प्लांट पर ठनी: वार्ड सभा में ग्रामीण बोले- नहीं बनने देंगे, मेयर का दावा- तय जगह पर ही बनेगा
प्रतीकात्मक तस्वीर: बेंगलुरु के मावल्लीपुरा लैंडफिल में कचरे के ढेर के बीच जमा गंदा पानी | फोटो: L. Shyamal / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड संख्या 9 स्थित सीतारामपुर में प्रस्तावित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (कचरा प्रबंधन) प्लांट को लेकर ग्रामीणों और नगर निगम के बीच टकराव गहरा गया है। मंगलवार (3 नवंबर) को न्यू फिल्टर प्लांट फुटबॉल मैदान में हुई विशेष वार्ड सभा में ग्रामीणों, विस्थापितों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में प्लांट का विरोध किया और ‘कचरा प्लांट गो बैक’ के नारे लगाए। उधर मेयर संजय सरदार का कहना है कि प्लांट तय जगह पर ही बनेगा।

वार्ड सभा में क्या कहा गया

हिन्दुस्तान के मुताबिक, वार्ड पार्षद दुर्गा चरण बेसरा के नेतृत्व में हुई सभा में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्लांट को लेकर स्थानीय लोगों को भरोसे में नहीं लिया गया। सभा में मानकी और पारंपरिक अगुवा ने नाराजगी जताई कि बुलावे के बावजूद न नगर आयुक्त पहुंचे, न प्रशासन का कोई प्रतिनिधि। उनका आरोप है कि ग्रामसभा की सहमति के बिना ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और डीपीआर तैयार कर ली गई। सीतारामपुर के ग्राम प्रधान (मांझी बाबा) रवि हांसदा ने कहा कि बिना पूर्व सूचना के इलाके में अचानक कचरा गिराना शुरू कर दिया गया, जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्षद बेसरा के अनुसार, ग्रामीणों की लिखित और मौखिक आपत्तियां संकलित कर उपायुक्त, नगर आयुक्त और राज्य सरकार को सौंपी जाएंगी।

मेयर का पक्ष

दूसरी ओर, मेयर संजय सरदार का कहना है कि आदित्यपुर में प्लांट के लिए अब कहीं और जमीन नहीं बची है। उनके मुताबिक, जब उस जगह चहारदीवारी बनाई गई थी, तब कोई विरोध नहीं हुआ था, और ग्रामसभा की जरूरत वहां पड़ती है जहां सरकारी जमीन न हो। उन्होंने बताया कि पूरी स्थिति से जिला प्रशासन को अवगत करा दिया गया है और अब आगे का फैसला प्रशासन के हाथ में है।

तीन साल से अटका प्रोजेक्ट

मेयर ने प्लांट न बन पाने के लिए सबसे ज्यादा एजेंसी क्यूब आदित्यपुर वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी को जिम्मेदार ठहराया। उनके अनुसार, 2023 में एमओयू हुआ और 2024 में जमीन मिल गई थी, लेकिन कई मौके मिलने के बावजूद एजेंसी ने तीन साल यूं ही गंवा दिए। इस आरोप पर एजेंसी का पक्ष सामने नहीं आया है।

(स्रोत: हिन्दुस्तान)

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संपादकीय टीम · संपादकीय डेस्क

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