दीपोत्सव के तुरंत बाद का हफ्ता ग्रहों की चाल के लिहाज़ से अहम रहने वाला है। द्रिक पंचांग (नई दिल्ली) के अनुसार 12 से 16 नवंबर के बीच मंगल राशि बदलेंगे, बुध और शुक्र अपनी वक्री (उल्टी) चाल छोड़कर मार्गी होंगे और सूर्य वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। इससे पहले 5 और 6 नवंबर की दरम्यानी रात 12:45 बजे वक्री शुक्र तुला से निकलकर दोबारा कन्या राशि में आ गए हैं।
तारीखवार ग्रहों की चाल
- 6 नवंबर, रात 12:45 बजे: वक्री शुक्र का कन्या राशि में प्रवेश
- 12 नवंबर, रात 8:30 बजे: मंगल का कर्क से सिंह राशि में गोचर
- 13 नवंबर, रात 9:22 बजे: बुध मार्गी, 24 अक्टूबर से 21 दिन वक्री रहने के बाद
- 14 नवंबर, सुबह 5:57 बजे: शुक्र मार्गी, 3 अक्टूबर से 42 दिन वक्री रहने के बाद
- 16 नवंबर, शाम 7:48 बजे: सूर्य का वृश्चिक राशि में प्रवेश (वृश्चिक संक्रांति)
- 22 नवंबर, शाम 5:38 बजे: शुक्र का फिर से तुला राशि में प्रवेश
इकोनॉमिक टाइम्स के 9 से 15 नवंबर के साप्ताहिक राशिफल में भी मंगल के 12 नवंबर को सिंह में जाने, बुध के 13 नवंबर को तुला राशि में मार्गी होने और शुक्र के 14 नवंबर को कन्या राशि में मार्गी होने का ज़िक्र है।
क्या कहती हैं ज्योतिषीय मान्यताएं
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मंगल का सिंह राशि में जाना रचनात्मकता, महत्वाकांक्षा और नई पहल को ऊर्जा देने वाला माना जाता है, जबकि बुध के मार्गी होने को अटकी बातचीत, कागज़ी काम और लंबित फैसलों के लिए राहत से जोड़ा जाता है। कन्या को शुक्र की नीच राशि माना जाता है। ET के मुताबिक वक्री और नीच के शुक्र के मार्गी होने से रिश्तों और साझेदारी से जुड़े मामलों पर धीरे-धीरे स्पष्टता आने की मान्यता है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि इन गोचरों का असर हर राशि पर अलग-अलग होगा, जो इस पर निर्भर करेगा कि कुंडली का कौन-सा भाव सक्रिय हो रहा है।
वृश्चिक संक्रांति के साथ सूर्य का वृश्चिक राशि में करीब एक महीने का गोचर शुरू होगा, जो 16 दिसंबर को सुबह 10:29 बजे धनु राशि में प्रवेश के साथ पूरा होगा।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक/ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। NEWS 7 JHARKHAND इसकी पुष्टि नहीं करता।
(स्रोत: Drik Panchang, The Economic Times)


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