सुप्रीम कोर्ट ने तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल की वह अर्जी शुक्रवार को खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने 2013 के दुष्कर्म मामले में मिली 10 साल के कठोर कारावास की सजा निलंबित करने की मांग की थी। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने तेजपाल और गोवा सरकार के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि वह सजा पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है।
हाईकोर्ट ने पलटा था बरी होने का फैसला
यह मामला 2013 में गोवा में पत्रिका के एक कार्यक्रम के दौरान एक होटल में हुई घटना से जुड़ा है, जिसमें तेजपाल पर अपनी एक कनिष्ठ सहकर्मी से दुष्कर्म का आरोप लगा था। गोवा की ट्रायल कोर्ट ने 2021 में उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को यह फैसला पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया और 10 साल की सजा सुनाई। तेजपाल ने 20 अगस्त को इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 62 वर्षीय तेजपाल खुद को राजनीतिक बदले की कार्रवाई का शिकार बताते रहे हैं।
बचाव पक्ष की दलीलें नहीं मानीं
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने होटल की लिफ्ट से जुड़े तकनीकी रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज जब्त न किए जाने और जांच की कथित खामियों पर सवाल उठाए। दूसरी ओर गोवा सरकार ने घटना के बाद भेजे गए माफी वाले ईमेल को अहम सबूत बताया। पीठ ने शुरुआती तौर पर रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री देखने के बाद माना कि फिलहाल सजा रोकने का कोई आधार नहीं बनता।
मुख्य अपीलें अभी लंबित
शीर्ष अदालत ने अभी केवल सजा निलंबन की मांग पर फैसला दिया है। दोषसिद्धि के खिलाफ तेजपाल की मुख्य अपील और गोवा सरकार की वह अपील, जिसमें उनके लिए उम्रकैद की मांग की गई है, दोनों अदालत के सामने लंबित हैं। इन पर सुनवाई आगे होगी।
(स्रोत: PTI/NDTV, अमर उजाला, लाइव हिन्दुस्तान)


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