आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर होल्डिंग एरिया के निर्माण के दौरान करीब 30 साल पुराने शीशम के हरे पेड़ को काटे जाने का आरोप लगा है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक बृहस्पतिवार को इससे जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि शीशम का पेड़ जड़ से काट दिया गया और दो अन्य पेड़ों की सभी डालियां काटकर केवल ठूंठ छोड़ दिए गए। वहीं, आगरा रेल मंडल ने किसी भी जीवित पेड़ को काटने से इनकार किया है।
टीटीजेड में पेड़ काटने के सख्त नियम
आगरा कैंट स्टेशन ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में आता है, जहां पेड़ों की कटाई के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति जरूरी है। ताजमहल से पांच किलोमीटर की हवाई दूरी के भीतर पेड़ काटने के लिए पहले सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) में आवेदन करना होता है और जरूरत साबित होने पर ही अनुमति मिलती है। ऐसी अनुमति के साथ एक पेड़ के बदले 10 पौधे लगाने और दस साल तक उनकी देखरेख करने की शर्त जुड़ी रहती है।
रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण स्थल पर करीब आधा दर्जन पेड़ लगे थे। कटे हुए पेड़ के अवशेष होल्डिंग जोन में ही पड़े दिखे और दो पेड़ों की डालियां आरी से काटी गई थीं।
रेलवे का पक्ष
आगरा रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम ने कहा कि आगरा कैंट पर होल्डिंग एरिया का निर्माण रेल भूमि विकास प्राधिकरण करा रहा है और इस दौरान किसी भी जीवित पेड़ को नहीं काटा गया। उनके मुताबिक पेड़ों की कटाई के आरोप वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने बताया कि निर्माण स्थल के भीतर पार्क क्षेत्र में एक पेड़ पहले से गिरा हुआ था, जिसे कार्यस्थल से हटाकर बाहर रखा गया है, जबकि निर्माण के दौरान दो-तीन पेड़ों की कुछ शाखाओं की सीमित छंटाई की गई।
ताज के आसपास पहले भी उठे सवाल
गौरतलब है कि इसी सप्ताह 3 नवंबर को ताजमहल के पास दो हरे पेड़ काटे जाने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसकी खबर अमर उजाला ने प्रकाशित की थी।
(स्रोत: अमर उजाला)


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