छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों ने गुरुवार को माओवादियों के छिपाकर रखे 711 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल) के गोले बरामद किए। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह जखीरा उसूर थाना क्षेत्र में ताड़ापाला स्थित फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (एफओबी) से करीब डेढ़ किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में कर्रेगुट्टा (केजी हिल्स) के जंगल में मिला।
खुफिया सूचना पर संयुक्त अभियान
पुलिस को इलाके में बड़ी मात्रा में विस्फोटक छिपाए जाने की खुफिया जानकारी मिली थी। इसके बाद जिला पुलिस बल, सीआरपीएफ की 196वीं वाहिनी और कोबरा की 204वीं बटालियन की संयुक्त टीम ने तलाशी अभियान चलाया। सभी गोलों को तय सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कब्जे में ले लिया गया है। दैनिक भास्कर के मुताबिक समय रहते इनके मिलने से जवानों पर हमले की आशंका टल गई।
आईईडी का खतरा बरकरार
पुलिस ने ग्रामीणों से फिलहाल कर्रेगुट्टा और आसपास की पहाड़ियों की ओर न जाने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि वहां आईईडी और दूसरे विस्फोटक दबे होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए योजनाबद्ध तरीके से इलाके में डी-माइनिंग यानी बारूदी सुरंगें हटाने का अभियान चलाया जाएगा।
कभी माओवादियों का गढ़ रहा इलाका
छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा की पहाड़ियां वरिष्ठ माओवादी नेताओं का सुरक्षित ठिकाना मानी जाती थीं। ईटीवी भारत के अनुसार वर्ष 2025 के अप्रैल-मई में यहां 21 दिन तक चले अभियान में कम से कम 31 माओवादी मारे गए थे और उसी साल नवंबर में सुरक्षा बलों ने इलाके में नया कैंप बनाया था। भास्कर के मुताबिक माओवादी यहां हथियार बनाने की फैक्ट्री भी चलाते थे, जिसे फोर्स ने 2025 में ध्वस्त किया। अब सुरक्षा बल पुराने ठिकानों में छिपाए गए हथियार और विस्फोटक खोजने का अभियान चला रहे हैं।
(स्रोत: दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत)


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