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शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
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झारखंड के ‘रीड-ए-थॉन’ को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह, 24 जिलों में 28.85 लाख लोगों ने एक साथ पढ़ीं किताबें

8 सितंबर को सुबह 11 से 11:30 बजे तक बच्चों, शिक्षकों, अभिभावकों और अफसरों ने एक साथ की पढ़ाई; रांची में रीडिंग कैंपेन-2026 का समापन

झारखंड के ‘रीड-ए-थॉन’ को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह, 24 जिलों में 28.85 लाख लोगों ने एक साथ पढ़ीं किताबें
प्रतीकात्मक तस्वीर: किताब पढ़ती छात्राएं | फोटो: Dr. Chinchu. C / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

बच्चों में पढ़ने की आदत डालने के लिए झारखंड में हुए राज्यव्यापी ‘रीड-ए-थॉन’ को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने सबसे ज्यादा प्रतिभागियों वाले आयोजन के रूप में मान्यता दी है। गुरुवार को रांची में हुए रीडिंग कैंपेन-2026 के समापन समारोह में इस उपलब्धि की चर्चा हुई और इसके लिए राज्य को बधाई दी गई।

30 मिनट, 24 जिले, 28 लाख से ज्यादा पाठक

दैनिक जागरण के मुताबिक यह मान्यता 8 सितंबर 2026 को हुए रीड-ए-थॉन के लिए मिली है। ‘मेरे शब्द, मेरी कहानी’ थीम वाले रीडिंग कैंपेन के तहत उस दिन राज्य के सभी 24 जिलों में कुल 28,85,734 लोगों ने सुबह 11 बजे से 11:30 बजे तक एक साथ पढ़ाई की। इनमें स्कूली बच्चे, शिक्षक, अभिभावक, समुदाय के लोग और जिला अधिकारी शामिल थे। आयोजन ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड’ यानी सारे काम रोककर पढ़ने की सोच पर आधारित था, इसलिए कक्षाओं के अलावा घरों और सार्वजनिक जगहों पर भी लोगों ने किताबें खोलीं।

समापन समारोह में क्या कहा गया

प्रभात खबर के अनुसार समापन कार्यक्रम में सभी जिलों के प्रतिनिधि, अधिकारी और सिविल सोसाइटी संगठनों के सदस्य जुटे। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने कहा कि नियमित पढ़ने की आदत बच्चों की पढ़ाई के साथ जीवनभर सीखने की बुनियाद बनती है, इसलिए स्कूल, घर और समुदाय, तीनों जगह इसका माहौल बनाना होगा। जेईपीसी के एसपीओ एवं क्वालिटी प्रभारी डॉ. अविनव कुमार ने कहा कि अभियान का लक्ष्य सिर्फ तात्कालिक जागरूकता नहीं, बल्कि लंबे समय तक टिकने वाला बदलाव होना चाहिए। रूम टू रीड इंडिया की कंट्री डायरेक्टर पूर्णिमा गर्ग ने वीडियो संदेश के जरिए रिकॉर्ड के लिए राज्य को बधाई दी।

आगे क्या

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह ने जमीनी स्तर पर काम करने वाली टीमों की सराहना की और कहा कि आनंद के साथ पढ़ने की संस्कृति विकसित करने वाली ऐसी पहलें लगातार चलनी चाहिए। समारोह में इस बात पर जोर दिया गया कि अभियान के दौरान बनी पढ़ने की आदत को स्कूलों और समुदायों में नियमित गतिविधि के रूप में जारी रखा जाए।

(स्रोत: प्रभात खबर, दैनिक जागरण)

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