सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड की डुमरा पंचायत के जंगल में करीब 16 जंगली हाथियों के झुंड के डेरा डालने से आसपास के गांवों में दहशत है। ग्रामीणों को डर है कि हाथी बस्तियों में घुसकर जान-माल और फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हिन्दुस्तान के मुताबिक, वन विभाग का कहना है कि हाथी फिलहाल शांत हैं, लेकिन खेतों में लगी धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
चांडिल और खरसावां से आकर जुटा झुंड
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इलाके में विचरण कर रहे इस झुंड में कुछ हाथी चांडिल और कुछ खरसावां क्षेत्र से आकर एकत्र हुए थे। ताजा जानकारी के मुताबिक, झुंड के आधे से अधिक हाथी डुमरा जंगल से चांडिल के खूंचीडीह की ओर रवाना हो गए हैं, लेकिन बाकी हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों का डर बना हुआ है। हाथियों ने कई किसानों के खेतों में धान की फसल बर्बाद की है, जिसके नुकसान का आकलन अब तक नहीं हो पाया है।
खूंचीडीह इलाके में किसान पर हमला
इसी बीच, चांडिल थाना क्षेत्र के खूंचीडीह के टोला लाकड़ागाढ़ा में बुधवार (4 नवंबर) शाम करीब साढ़े छह बजे धान की फसल को हाथियों से बचाने गए किसान संजय महतो पर एक जंगली हाथी ने हमला कर दिया। हाथी ने उन्हें सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। वनरक्षी मुन्ना सोरेन ने उन्हें टीएमएच में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वन विभाग ने 17 हाथियों के एक झुंड को 17 अक्टूबर को सिनी के रास्ते खरसावां की ओर भेजा था, जो 3 नवंबर को फिर चौका इलाके में लौट आया।
कोल्हान में अलार्म सिस्टम की पहल
हाथी और इंसान के बीच टकराव कम करने के लिए वन विभाग ने कोल्हान के सारंडा, पोड़ाहाट और आसपास के गांवों में अब तक 25 जगहों पर सौर ऊर्जा से चलने वाला एलीफेंट अलार्म सिस्टम लगाया है। इसके जरिए वनकर्मी मोबाइल से भी अलार्म बजाकर गांवों को हाथियों के आने से पहले सतर्क कर सकते हैं।
(स्रोत: हिन्दुस्तान)


टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।