नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र (बालेन) शाह 22 नवंबर से भारत की तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर आएंगे। मार्च में पद संभालने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा होगी। द इंडियन एक्सप्रेस ने अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है। दौरे की तस्वीर गुरुवार को काठमांडू में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी और प्रधानमंत्री शाह की मुलाकात के बाद साफ हुई।
मिसरी की दो दिन की नेपाल यात्रा
मिसरी 4 और 5 नवंबर को नेपाल में थे। भारत और नेपाल के विदेश मंत्रालयों के संयुक्त बयान के मुताबिक, उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति की जानकारी दी और प्रधानमंत्री शाह की आगामी भारत यात्रा के संभावित नतीजों और पहलों पर चर्चा की। बुधवार को उन्होंने नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की। उन्होंने वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले, विदेश मंत्री शिशिर खनाल, ऊर्जा-जल संसाधन मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ और बुनियादी ढांचा विकास मंत्री सुनील लम्साल से भी मुलाकात की। बातचीत में व्यापार, जलविद्युत, कनेक्टिविटी, सीमा प्रबंधन और ऊर्जा के साथ डिजिटल कनेक्टिविटी और एआई जैसे नए क्षेत्र भी शामिल रहे।
बदला शाह का रुख
शाह ने पहले घोषणा की थी कि वह पद के पहले साल कोई विदेश यात्रा नहीं करेंगे। लाइव हिन्दुस्तान के मुताबिक, मई में मिसरी की प्रस्तावित नेपाल यात्रा इसलिए रद्द हो गई थी, क्योंकि यह साफ हो गया था कि शाह उनसे नहीं मिलेंगे। अगस्त में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत ने तुरंत मदद भेजी थी। संयुक्त बयान में भी नेपाली नेताओं ने भारत की त्वरित मानवीय और तकनीकी सहायता के लिए आभार जताया।
दोनों देशों के रिश्तों में लिपुलेख-कालापानी-लिंपियाधुरा क्षेत्र का सीमा विवाद एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। द हिंदू के मुताबिक, भारत चाहता है कि इसका समाधान केवल द्विपक्षीय बातचीत से हो।
(स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, द हिंदू, लाइव हिन्दुस्तान)


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