भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का दूसरी पीढ़ी का नेविगेशन उपग्रह NVS-03 अपनी तय भू-तुल्यकाली (जियो-सिंक्रोनस) कक्षा में पहुंच गया है। इसरो के मुताबिक चार कक्षा-संवर्धन अभियानों में उपग्रह के लिक्विड अपोजी मोटर (LAM) इंजन को कुल 6,164 सेकंड चलाया गया, जिसके बाद यह 35,765 x 36,196 किलोमीटर की कक्षा में करीब 29.98 डिग्री के झुकाव पर स्थापित हो गया। इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने गुरुवार को चेन्नई में कहा कि उपग्रह पूरी तरह स्वस्थ है और अब उसके पेलोड का कक्षा में परीक्षण किया जाएगा।
NVS-02 की नाकामी के बाद अहम कामयाबी
यह उपलब्धि इसलिए खास है, क्योंकि जनवरी 2025 में लॉन्च हुआ NVS-02 वाल्व की खराबी के कारण इसी चरण में अपनी तय कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था। NVS-03 को 30 अक्टूबर की आधी रात के बाद श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F18 रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया था। इसरो प्रमुख के मुताबिक यह लगातार दो GSLV मिशनों के बीच अब तक का सबसे कम, सिर्फ 56 दिन का अंतराल था।
क्या है नाविक और क्यों ज़रूरी
नाविक (NavIC) भारत की अपनी क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली है, जो अमेरिका के जीपीएस की तरह भारत और उसकी सीमा से करीब 1,500 किलोमीटर तक के इलाके में स्थिति, नेविगेशन और समय से जुड़ी सेवाएं देती है। उपग्रहों के रिटायर होने, परमाणु घड़ियों की खराबी और प्रक्षेपण की नाकामियों के चलते यह प्रणाली स्वतंत्र रूप से लोकेशन बताने की क्षमता खो चुकी थी, क्योंकि इसके लिए कम से कम चार सक्रिय उपग्रह ज़रूरी हैं। इसरो प्रमुख के मुताबिक NVS-03 के साथ यह न्यूनतम संख्या फिर पूरी हो गई है।
NVS-03 में स्वदेशी परमाणु घड़ी के साथ L1, L5 और S बैंड के सिग्नल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रक्षेपण के बाद इसे स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली को मज़बूत करने की दिशा में अहम कदम बताया था।
(स्रोत: The Hindu, Indian Express)


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