बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंड स्कीमों के शेयर सौदों के निपटान का तरीका आसान करने वाला सर्कुलर जारी किया है। 5 नवंबर को जारी सर्कुलर के मुताबिक कोई भी म्यूचुअल फंड स्कीम कैश सेगमेंट में किए गए ‘आउटराइट’ सौदों के पैसों का नेट सेटलमेंट कर सकेगी, यानी खरीद और बिक्री की रकम आपस में घटाकर सिर्फ अंतर का लेन-देन होगा। यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2027 से लागू होगी।
अभी क्या है नियम
मौजूदा नियमों में संस्थागत निवेशक इंट्रा-डे कारोबार नहीं कर सकते और उनके हर सौदे का निपटान डिलीवरी के आधार पर पूरी रकम के साथ अलग-अलग होता है। इससे फंड को कई बार कुछ समय के लिए अतिरिक्त नकदी जुटानी पड़ती है। सेबी के मुताबिक नए ढांचे का मकसद कामकाज की कुशलता बढ़ाना और अस्थायी फंडिंग की जरूरत घटाना है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को ऐसी छूट सेबी अप्रैल में ही दे चुका है।
किन सौदों पर मिलेगी छूट
- आउटराइट सौदा वह है, जिसमें एक सेटलमेंट साइकिल में किसी शेयर की सिर्फ खरीद या सिर्फ बिक्री हुई हो। अगर स्कीम ने उसी शेयर को उसी साइकिल में खरीदा और बेचा भी है, तो वह सौदा नेटिंग से बाहर रहेगा।
- नेटिंग सिर्फ एक स्कीम के भीतर होगी; एक ही फंड हाउस की दो स्कीमों के बीच रकम का समायोजन नहीं होगा।
- डेरिवेटिव, शेयर उधारी (एसएलबी) और शॉर्ट सेल से जुड़े सौदों पर यह व्यवस्था लागू नहीं होगी।
- शेयरों का निपटान पहले की तरह पूरे (ग्रॉस) आधार पर होगा। एसटीटी और स्टांप ड्यूटी भी डिलीवरी के आधार पर ही लगेंगे।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी स्कीम ने एक ही साइकिल में एक कंपनी के 10 लाख रुपये के शेयर खरीदे और दूसरी कंपनी के 15 लाख रुपये के शेयर बेचे, तो नए ढांचे में दोनों रकमों को आपस में घटाकर सिर्फ 5 लाख रुपये का निपटान होगा।
निवेशकों पर असर
सेबी ने साफ किया है कि नेटिंग से स्कीम के हिसाब-किताब, एनएवी की गणना, निवेश सीमा या यूनिटधारकों के हितों पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। इसे लागू करने के तकनीकी मानक एम्फी (AMFI) क्लियरिंग कॉरपोरेशनों, एक्सचेंजों और कस्टोडियनों के साथ मिलकर तय करेगा और ट्रस्टी इसके अमल की समीक्षा करेंगे।
(स्रोत: सेबी सर्कुलर, प्रभात खबर)


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