सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की गुणवत्ता, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने के मकसद से बुधवार को दुमका के इंडोर स्टेडियम में राज्यस्तरीय जागरूकता कार्यशाला हुई। झारखंड सरकार के उद्योग विभाग और झारखंड औद्योगिक अवसंरचना विकास निगम (जिडको) की ओर से विश्व बैंक समर्थित रैंप (RAMP) कार्यक्रम के तहत जिला उद्योग केंद्र, दुमका ने इसका आयोजन किया। इसमें दुमका और जामताड़ा के 183 उद्यमी शामिल हुए, जिनमें 40 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से थे।
बुनियादी सुविधाओं पर जोर
मुख्य अतिथि उप विकास आयुक्त अनिकेत सचान ने बुनकरों, महिला कारीगरों और सूक्ष्म उद्यमियों की व्यावहारिक दिक्कतों पर बात की और निर्बाध बिजली को सबसे बड़ी जरूरत बताया। उन्होंने स्फूर्ति योजना के तहत सौर ऊर्जा पर मिलने वाली सब्सिडी और प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी दी। उनका कहना था कि अच्छे कारोबारी माहौल के साथ पानी, सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाएं भी जरूरी हैं। उन्होंने महिला और एससी-एसटी उद्यमियों से सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर स्वरोजगार बढ़ाने की अपील की।
किन विषयों पर मिली जानकारी
- एमएसएमई-डीएफओ धनबाद के सहायक निदेशक दीपक कुमार ने जेड (जीरो इफेक्ट, जीरो डिफेक्ट) और लीन योजनाओं के जरिए उत्पादन की गुणवत्ता और कार्यकुशलता सुधारने के तरीके बताए।
- नाबार्ड और अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) ने बैंक ऋण और वित्तीय सहायता की प्रक्रिया समझाई।
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस प्रबंधकों ने ओडीआर, एमएसईएफसी और टीआरईडीएस के जरिए विलंबित भुगतान के विवाद सुलझाने और उद्यम पंजीकरण के फायदे बताए।
- श्रम कानूनों, जेएसएलपीएस से जुड़े स्वयं सहायता समूहों और टूल रूम जरदाहा के तकनीकी प्रशिक्षण पर भी जानकारी दी गई।
इसी दिन रैंप कार्यक्रम के तहत सिमडेगा के केरिया पंचायत भवन में भी जिला उद्योग केंद्र ने एमएसएमई समाधान, एमएसईएफसी और टीआरईडीएस पर कार्यशाला लगाई, जिसमें उद्यमियों को समय पर भुगतान पाने और भुगतान विवाद निपटाने की प्रक्रिया बताई गई।
(स्रोत: प्रभात खबर)


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