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शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
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इंडियाएआई मिशन के तहत तीन स्वदेशी एआई मॉडल पेश: EKA-1, धीर 2B और धीर 5B, बिना इंटरनेट भी करेंगे काम

बेंगलुरु की कंपनियों सॉकेट एआई और ज़ेनटेइक्यू ने बनाए मॉडल; एआईकोश प्लेटफॉर्म पर शोधकर्ताओं, छात्रों और आम लोगों के लिए उपलब्ध

इंडियाएआई मिशन के तहत तीन स्वदेशी एआई मॉडल पेश: EKA-1, धीर 2B और धीर 5B, बिना इंटरनेट भी करेंगे काम
प्रतीकात्मक तस्वीर: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ग्राफिक चित्रण | फोटो: Pixabay / Wikimedia Commons (CC0)

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी) ने इंडियाएआई मिशन के तहत देश में विकसित तीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फाउंडेशन मॉडल, EKA-1, धीर 2B और धीर 5B, पेश किए हैं। इन्हें बेंगलुरु की कंपनियों सॉकेट एआई और ज़ेनटेइक्यू (ZenteiQ) ने मिशन की फाउंडेशन मॉडल पहल के तहत तैयार किया है। इनकी बड़ी खासियत यह है कि इन्हें इंटरनेट से कटे सुरक्षित सिस्टम (एयर-गैप्ड) पर भी चलाया जा सकता है।

EKA-1: गणित, कोडिंग और तर्क पर ज़ोर

सॉकेट एआई का EKA-1 करीब 26 अरब पैरामीटर वाला मॉडल है, जिसे 7.5 ट्रिलियन टोकन पर प्रशिक्षित किया गया है। इसे गणित, कोडिंग और तर्क-आधारित जवाबों के लिए बनाया गया है और यह कई चरणों वाले काम करने व कोड चलाने में सक्षम है। पीटीआई के मुताबिक यह भारत की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं के साथ अंग्रेज़ी में काम कर सकता है, जबकि एएनआई की रिपोर्ट में इसके 100 से ज़्यादा भारतीय व अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के साथ प्रोग्रामिंग भाषाओं को सपोर्ट करने की बात कही गई है। इसे खास तौर पर बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और साइबर सुरक्षा की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

धीर: मोबाइल पर बिना इंटरनेट

ज़ेनटेइक्यू के धीर 2B और धीर 5B हल्के ‘मिक्सचर-ऑफ-एक्सपर्ट्स’ मॉडल हैं, जिन्हें शुरू से प्रशिक्षित किया गया है। ये अंग्रेज़ी और 10 भारतीय भाषाओं में काम करते हैं और परीक्षण किए गए मोबाइल हार्डवेयर पर बिना इंटरनेट कनेक्शन के चल सकते हैं। इससे यूज़र का डेटा उसके डिवाइस पर ही रहेगा। कंपनी ने इनके मॉडल वेट्स अपाचे 2.0 लाइसेंस के तहत एआईकोश पर जारी किए हैं।

मेइटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि ये मॉडल एआई में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मज़बूत करेंगे। उनके मुताबिक इंटरनेट से कटे माहौल में चल पाने की क्षमता से उद्यमों में एआई का इस्तेमाल बढ़ सकता है, जो अब तक खास रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। ये मॉडल एआईकोश के ज़रिये शोधकर्ताओं, छात्रों, उद्यमों और आम लोगों के लिए उपलब्ध हैं।

(स्रोत: Mint (ANI), अमर उजाला (PTI))

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