भारत में करीब एक महीने की धार्मिक यात्रा पूरी करने के बाद पाकिस्तान से आए 49 सिख श्रद्धालुओं का जत्था अटारी-वाघा सीमा के रास्ते वतन लौट गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विशेष मामले के तौर पर इस जत्थे को सड़क मार्ग से लौटने की अनुमति दी। अमर उजाला के मुताबिक, यह सीमा मार्ग पहलगाम आतंकी हमले के बाद से बंद पड़ा था। अटारी पर इमिग्रेशन और सुरक्षा जांच की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं को पाकिस्तान रवाना किया गया।
इन गुरुद्वारों में टेका माथा
यह जत्था 8 अक्तूबर को लाहौर से ताशकंद होते हुए उज्बेकिस्तान एयरवेज की उड़ान से नई दिल्ली पहुंचा था। इसमें 21 पुरुष, 26 महिलाएं और दो बच्चे शामिल थे, जो ननकाना साहिब और आसपास के इलाकों से आए थे। भारत प्रवास के दौरान श्रद्धालुओं ने उत्तराखंड के श्री हेमकुंट साहिब, श्री आनंदपुर साहिब, अमृतसर के श्री हरिमंदिर साहिब और दिल्ली के कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन किए। अमर उजाला के अनुसार, जत्थे के करीब 40 सदस्यों को हेमकुंट साहिब जाने की विशेष अनुमति मिली थी।
हवाई टिकट छोड़ सड़क मार्ग से वापसी
श्रद्धालुओं को पहले 30 अक्तूबर को दिल्ली से ताशकंद होते हुए विमान से लौटना था और इसके लिए महंगे टिकट भी बुक कराए जा चुके थे। दैनिक जागरण के मुताबिक, कनेक्टिंग फ्लाइट और कागजी प्रक्रिया के चलते इस सफर में 22 से 24 घंटे लग रहे थे। इसके बाद दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और अन्य पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार से सड़क मार्ग से वापसी की इजाजत देने की अपील की, जिसे मंजूर कर लिया गया। श्रद्धालुओं ने अपने हवाई टिकट सरेंडर कर दिए हैं और रिफंड की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
श्रद्धालुओं ने जताया आभार
जत्थे के नेता पपिंदर सिंह ने इस व्यवस्था के लिए भारत और पाकिस्तान सरकार के साथ डीएसजीएमसी का धन्यवाद किया। ननकाना साहिब से आए श्रद्धालु भूपिंदर सिंह ने बताया कि वे 30 दिन के वीजा पर भारत आए थे और हेमकुंट साहिब व श्री हरिमंदिर साहिब के दर्शन उनके जीवन का सबसे यादगार अनुभव रहे।
(स्रोत: अमर उजाला, दैनिक जागरण)


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