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शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
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यूपी के 205 नगर निकायों में बनेंगे 1,01,483 पीएम आवास, मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने दी मंजूरी

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के बीएलसी घटक में प्रदेश के लिए स्वीकृत घरों की कुल संख्या बढ़कर 5,90,007 हुई

यूपी के 205 नगर निकायों में बनेंगे 1,01,483 पीएम आवास, मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने दी मंजूरी
प्रतीकात्मक तस्वीर: ईंट और कंक्रीट से बनता एक पक्का मकान | फोटो: Timothy A. Gonsalves / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

उत्तर प्रदेश के शहरी इलाकों में पक्के घर का इंतजार कर रहे परिवारों के लिए राहत की खबर है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण (बीएलसी) घटक के तहत प्रदेश के 205 नगर निकायों में 1,01,483 नए आवास बनाए जाएंगे। मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (एसएलएसएमसी) की बैठक में इसकी मंजूरी दी गई।

कुल स्वीकृत आवास 5.90 लाख के पार

इस मंजूरी के बाद पीएम आवास योजना शहरी 2.0 के बीएलसी घटक में प्रदेश के लिए स्वीकृत घरों की कुल संख्या 5,90,007 हो जाएगी। बीएलसी घटक में पात्र लाभार्थी सरकारी सहायता से अपना पक्का मकान खुद बनवाते हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि यह कदम शहरों के पात्र और जरूरतमंद परिवारों को पक्की छत देने और उनका जीवन स्तर बेहतर बनाने की दिशा में अहम है।

13 परियोजनाओं के लिए केंद्र की अगली किस्त का रास्ता साफ

बैठक में भागीदारी में किफायती आवास (एएचपी) घटक के तहत स्वीकृत 13 परियोजनाओं पर भी फैसला लिया गया। थर्ड पार्टी क्वालिटी मॉनिटरिंग की रिपोर्ट के आधार पर तैयार अनुपालन आख्या (एटीआर) को मंजूरी दी गई, जिससे इन परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार के हिस्से की अगली किस्त मिलने का रास्ता खुल जाएगा। मुख्य सचिव ने एएचपी की सभी परियोजनाओं को तय समय में और गुणवत्ता के साथ पूरा कराने तथा उनकी नियमित निगरानी के निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरुप्रसाद समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

भू-उपयोग बदलने के लटके मामलों की भी होगी जांच

लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक शासन भू-उपयोग परिवर्तन के लंबे समय से लंबित मामलों, खासकर उद्योगों और संस्थाओं से जुड़े मामलों का परीक्षण भी कराएगा। छोटी-मोटी आपत्तियां दूर कर प्रक्रिया तेज की जाएगी, जबकि विवादित मामलों पर विचार नहीं होगा। छह हजार वर्ग मीटर तक के भूखंडों का भू-उपयोग बदलने का अधिकार अब विकास प्राधिकरणों के पास है, जबकि इससे बड़े मामलों का निपटारा शासन स्तर पर होता है।

(स्रोत: Live Hindustan)

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संपादकीय टीम · संपादकीय डेस्क

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