पश्चिमी सिंहभूम जिले में जंगली हाथियों की लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरुवार, 5 नवंबर को झींकपानी प्रखंड के टोंटो थाना क्षेत्र में सालीकुटी और जोड़ापोखर गांव के बीच करंट लगने से एक नर हाथी की मौत हो गई। प्रभात खबर के मुताबिक, राज्य गठन के बाद से अब तक जिले के चार वन प्रमंडलों में 66 हाथियों की जान जा चुकी है।
खंभा गिरा, टूटे तार की चपेट में आया हाथी
बताया गया कि हाथियों का एक झुंड सालीकुटी गांव के आसपास से गुजर रहा था। इसी दौरान झुंड के एक हाथी के धक्के से बिजली का खंभा गिर गया और तार टूटकर नीचे आ गया। उसी तार की चपेट में आकर नर हाथी की मौके पर मौत हो गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम पहुंची और जांच शुरू की। इससे पहले मंगलवार रात टांकुरा गांव के एक टोले में करीब 35 वर्ष की मादा हथिनी की मौत हुई थी, जिसकी वजह अब तक साफ नहीं है। अक्टूबर में रेंगारबेड़ा गांव में भी दो हाथियों की मौत की बात सामने आई थी।
26 साल में 66 मौतें
- चाईबासा वन प्रमंडल: 34
- कोल्हान वन प्रमंडल: 13
- सारंडा वन प्रमंडल: 11
- पोड़ाहाट वन प्रमंडल: 8
दो दिन में मांगी गई जांच रिपोर्ट
लगातार घटनाओं पर मुख्य वन संरक्षक स्मिता पंकज ने चिंता जताते हुए टीम बनाकर सभी मामलों की गहन जांच, मौत के असली कारणों का पता लगाने और अब तक की कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट दो दिनों के भीतर देने का निर्देश दिया है। अखबार के मुताबिक, चाईबासा के वन प्रमंडल पदाधिकारी से संपर्क नहीं हो सका; कार्यालय कर्मियों ने बताया कि वे अस्वस्थ हैं और इलाज के लिए बाहर गए हैं। वन्यजीव जानकारों का कहना है कि हाथियों के आवागमन वाले इलाकों में बिजली के तारों की नियमित जांच, जंगलों में निगरानी और संदिग्ध मौतों की वैज्ञानिक जांच के साथ बिजली और वन विभाग के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
(स्रोत: प्रभात खबर)


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