सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां स्थित ऐतिहासिक पदमपुर (तेलासाही) में मां काली की पूजा और सात दिवसीय मेले की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। करीब 129 साल से चली आ रही तांत्रिक पूजा की परंपरा के तहत 8 नवंबर की रात नौ बजे विधि-विधान से पूजा शुरू होगी। मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है और खास बिजली सज्जा की जा रही है।
पूजा और मेले का कार्यक्रम
- 8 नवंबर, रात 9 बजे: प्रतिमा स्थापना के साथ तांत्रिक विधि से मां काली की पूजा
- 9 नवंबर, सुबह से: सात दिवसीय काली मेले की शुरुआत
- 14 नवंबर, शाम 4 बजे: प्रतिमा का विसर्जन
आयोजकों के अनुसार, मेले के दौरान कोल्हान के अलग-अलग इलाकों के अलावा पड़ोसी राज्य ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। इस बार 70 से 80 हजार से ज्यादा लोगों के आने का अनुमान है।
1897 से चली आ रही परंपरा, कलिंग शैली का मंदिर
पदमपुर गांव में मां काली की पूजा 1897 से तांत्रिक विधि से होती आ रही है। यहां का मंदिर अपनी कलिंग वास्तुशैली के लिए जाना जाता है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर उकेरी गई मूर्तियां, चित्रकारी और हस्तशिल्प श्रद्धालुओं के साथ सैलानियों को भी खींचते हैं। मुख्य प्रवेश द्वार पर ओडिशा के कोणार्क मंदिर की तर्ज पर बना सूर्य चक्र खास आकर्षण है।
झूले, दुकानें और नाटक
मेले में नाव झूला, ड्रैगन झूला, चांद-तारा, ब्रेक डांस और थ्री-डी झूले समेत कई तरह के झूले लगेंगे और दर्जनों दुकानें सजेंगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत ओडिशा की एक नाट्य संस्था ओड़िया नाटकों का मंचन करेगी, जबकि एक अन्य ओपेरा दल हो भाषा में नाटक पेश करेगा। आस्था, परंपरा और लोक मनोरंजन के इस संगम को कोल्हान के प्रमुख आयोजनों में गिना जाता है।
(स्रोत: प्रभात खबर)


टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।